जानें सपा की हार के चार बडे कारण

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fajilnagar vidhansabha

समाजवादी पार्टी ने यूपी चुनाव 2022 को करो या मरो की स्थिति के रूप में लिया। इसके लिए राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने जी तोड मेहनत भी की। भाजपा के कई दिग्गज नेता भी तोडकर अपनी पार्टी में मिला लिए। कई बडे बडे वादे भी जनता से किए जिसमें मुफ्त बिजली, सरकारी कर्मचारियों की पुरानी पेंशन योजना लागू करना, जैसे कई शामिल रहे। इस मेहनत के बाद अखिलेश यादव के वोट प्रतिशत में बडी बढोत्तरी हुई इसके साथ ह ीवह मुख्य विपक्षी दल बनने में भी सफल रहे लेकिन सरकार बनाने से कोसों दूर रह गए जानते हैं अखिलेश यादव की हार के बडे कारण
बडे नेताओं की कमी
समाजवादी पार्टी पर स्वयं अखिलेश यादव के अलावा कोई भी बडा नेता नहीं था। जिसे स्टार प्रचारक के रूप में अखिलेश यादव की तरह जनता स्वीकार कर पाती। जहां भाजपा पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, गृहमंत्री अमित शाह, योगी आदित्यनाथ, राजनाथ सिंह जैसे बडे नेताओं की फौज थी वहीं सपा के साथ तो कभी सपा की धुरी कहे जाने वाले शिवपाल यादव भी नजर नहीं आ रहे थे। मुलायम सिंह यादव के कमजोर हो जाने के कारण वह केवल दो रैलियां ही कर पाए थे।
चुनावी वादो पर जनता का अविश्वास
अखिलेश यादव ने बडे बडे चुनावी वादे तो किए लेकिन जनता उनके इन वादों पर विश्वास नहीं कर पाए। जनता को लग रहा था कि जितने ज्यादा चुनावी वादे अखिलेश यादव कर रहे है। वह वादे पूरे कर पाना संभव ही नहीं हैं। जबकि भाजपा ने अपने कार्यकाल में जो कार्य किया था वह लोगों के लिए विश्वसनीय रहा।
समर्थकों की खराब छवि
सपा की पिछली सरकारों मे जो गुण्डागर्दी प्रदेश में हुई थी उससे लोग बुरी तरह त्रस्त हो गए थे। लोगों को विश्वास था कि अगर सपा की सरकार बनी तो वहीं गुण्डा गर्दी होगी। अखिलेश ने नया नारा दिया कि नई हवा है नई सपा है लेकिन भाजपा लोगों को यह बताने में सफल रही कि वही हवा है वहीं सपा है। यह भी सपा की हार का बड कारण रहा है। इस आग में घी डालने का काम किया उनके कार्यकर्ताआंें व समर्थकों ने कई जगहों की खबरें अखबारों में छपीं कि 10 मार्च के बाद देख लेंगे। इसके साथ ही संभल का एक वीडियो वायरल हुआ था कि सरकार आने दो दस मार्च के बाद देख लेंगे। एक सपा गठबंधन के प्रत्याशी ने धमकी दी थी कि मैं अखिलेश भैया से कहकर आया हूं कि मैं अधिकारियों से कहकर आया हूं कि इन अधिकारियों का कोई भी तबादला नहीं होगा पहले इनसे यहीं रहकर हिसाब किताब होगा। एक भाजपा समर्थक ने तो यहंा तक कहा था कि सपा कार्यकर्ता ऐसी छवि छोडकर गए हैं कि अब कभी नहीं आऐंगे।
टिकिट वितरण
टिकिट वितरण भी अखिलेश यादव की हार का बडा कारण रहा उन्होंने पश्चिम में जो मुस्लिम उम्मीदवार उतारे थे वह पहले से ही कहीं ना कहीं सांप्रदायिकता के लिए बदनाम थे। चाहे मुजफ्रनगर दंगों के आरोपी हों या फिर कोई और। जिन वजहों से सपा बदनाम थी टिकिट वितरण में वह सब चीजें साफ दिखाई दीं।

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