संज्ञेय अपराध दर्ज होने के बाद बिना किसी ठोस सबूत के निरस्त करना उचित नहीं: इलाहाबाद हाईकोर्ट

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Supreme Court Order

संज्ञेय अपराध हाने के बाद एफआईआर रद्द करना उचित नहीं हैं। ऐसा मानना है हाईकोर्ट इलाहाबाद का। ऐसे ही एक मामले में एक एफआईआर रद्द करने की एक याचिका इलाहाबाद हाई कोर्ट के न्यायमूर्ति अश्वनी कुमार मिश्रा एवं न्यायमूर्ति अजय त्यागी की अदालत में आया। तब उन्होंने यह निर्णय देते हुए कहा था। न्यायमूर्तिगण ने झांसी जिले के सिपरी थाने के गोविंद द्विवेदी की याचिका को निरस्त कर दिया।

इस मामले में दर्ज एफआईआर के अनुसार गैर इरादतन हत्या का आरोप याची पर लगा था। हुआ यूं था कि विद्युत आपूर्ति बहाल हो जाने से बिजली लाइन पर काम करने वाले लाइनमेन की मृत्यु हो गई थी। इसका आरोप याची पर लगा था। याची का कहना था कि लाइन पर दो लाइनमेन काम कर रहे थे दोनों ने एक साथ ही शटडाउन लिया था। लेकिन एक ने शटडाउन वापस करते हुए आपूर्ति बहाल करने को कहा। लाइन में आपूति बहाल होते ही लाइन पर काम कर रहे दूसरे लाइन मेन की मौके पर ही मौत हो गई। High Court Allahabad

इस मामले का मुकदमा जनपद झांसी के सिपरी थाने में दर्ज हुआ था। याची ने इसी आधार पर एफआईआर दर्ज निरस्त करने की मांग की थी। तब सरकारी अधिवक्ता ने इस बात का विरोध करते हुए कहा था कि मामले की जांच जरूरी है।

यहां महत्वपूर्ण प्रश्न यह है कि यहां कोई लापरवाही हुई थी या फिर यह कृत्य जानबूझकर किया गया था। अगर लापरवाही थी तब किसकी थी और अगर जानबूझकर किया गया यह कृत्य है तब यह कृत्य किसके द्वारा किया गया है।

इस आधार पर हाईकोर्ट की बेंच ने कहा कि जब संज्ञेय अपना दर्ज हुआ है तब उसकी विवेचना होनी चाहिए इस स्तर पर एफआईआर का निरस्त करना उचित नहीं है। जब प्रथम दृष्टया मामला दर्ज होता है तब उसकी जांच होना जरूरी हो जाता है। यहां कई ऐसे प्रश्न हैं, जो जांच का विषय हैं। जांच हुए बिना एफआईआर रद्द करना उचित नहीं होगा। इस आधार पर याचिका पोषणीय नहीं और याचिका निरस्त की जाती है। यदि याचिकाकर्ता चाहे तो मामले को उचित फोरम के समक्ष प्रस्तुत कर राहत की मांग कर सकता है।

 After causing the national culinary, the CI can not be convinced. It is believed to have highychla killed of Allahabad. In such a case, one petition of cancellation of an FIR came to the court of the Allahabad High Court’s Justice Ashwani Kumar Mishra and Justice Ajay Tyagi. Then he said this decision. Justice Garnan, revoked the petition of Gupind Dwivedi of Shipary Police of Jhansi district. According to the FIR recorded in this case, the charges of non-intentional killing were on the same. There was a period of time that the Linemen died on the power line working on the power supply was restored. Its charge was on. Yiye said that two linear on the line were working both of them together as shutdown. But one said to restore the supply while shutdown shutdown. The second line working on line line remains restored in line, the same time went on the spot of the Maine. The lawsuit of this case was recorded in the Shipary station of Jhandha Jhansi. The ye had demanded to revoke the FIR on this basis. Then the government advocate opposed this thing that the investigation of the case is necessary. The important question here is that there was a negligence here or this act was deliberately. If there was negligence, whose was and if it is deliberately, then this act is done by whom it has been done. On this basis, the Highcort’s Bench said that when the cognitive has been registered, it should be a deletion of this time, it is not appropriate to reorganize FIR. When the first example case is recorded, it is necessary to be investigated. There are many questions that are the subject of investigation. Canceling FIR without investigation will not be appropriate. On this basis, the petition is not cultured and the petition is revoked. If the petitioner can be demanded to refer to the case by the proper forum, the case is referred to the react form.

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