बिसौली में झोलाछाप डाक्टरों का कहर, दर्जन भर मौतें, प्रशासन मौन

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बिसौली में झोलाछाप डाक्टरों

बिसौली में झोलाछाप डाक्टरों का कहर बरस रहा है। इन झोलाछाप डाक्टरों के कहर से दर्जन भर से अधिक मौतें हो चुकी हैं लेकिन प्रशासन मौन बना हुआ है। मौत के कुछ दिन बाद इनके अस्पताल सुचारू रूप से चलने लगते हैं। इस सबसे स्वास्थ्य एवं चिकित्सा विभाग की मिली भगत भी दिखाई देती है।
यहां बता दें कि बदायूं जनपद की सबसे बढिया तहसील बिसौली कही जाती है। इस तहसील के मुख्यालय पर स्वास्थ्य व चिकित्सा विभाग की मिली भगत से नगर में आधा दर्जन से अधिक झोलाछाप अस्पताला चल रहे हैं। इन अस्पतालों में कोई भी चिकित्सक तैनात नहीं रहता है। कुछ दिनों किसी बडे चिकित्सक के यहां काम करने वाली नर्सों को इस अस्पताल में तैनात कर दिया जाता है। इसका संचालक एक दो झोलाछाप डाक्टरों को रखता है। यह झोलाछाप डाक्टर किसी डाक्टर के यहां रहकर कुछ दवाइयों को सीख लेते हैं वही डाक्टर इन अस्पतालों का संचालन करते हैं। यहां बता दें कि इन अस्पतालों में सर्वाधिक कार्य गर्भवती महिलाओं की डिलीवरी का होता है।

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इन झोलाछाप अस्पतालों में मरीज लाने की जिम्मेदारी स्वास्थ्य विभाग में तैनात आशाओं का होता है। इसके बदले इस अस्पताल के संचालक इन आशाओं को अच्छी खासी रकम देते हैं। इस कारण से यह आशाऐं गर्भवती महिला को बताती हैं कि इस समय इस अस्पताल में डाक्टर बहुत अच्छे हैं। इनके यहां बहुत अच्छी डिलीवरी होती है। इस काम में सरकारी अस्पताल की नर्सें भी शामिल रहती हैं। गर्भवती महिला के अस्पताल में पहुंचते ही वह बताती हैं कि डिलीवरी मुश्किल है जच्चा बच्चा को खतरा है। इसके बाद आशा बताती हैं कि उस अस्पताल में चलो वहां बढिया काम हो जाएगा। इस प्रकार से इस झांसे में फंसी महिला उस अस्पताल पहुंच जाती है। जहां उसका भाग्य होता है तो बच जाती है या फिर मारी जाती है। हाल ही में दो झोला छाप अस्पतालों में दो गर्भवती महिलाओं की मौतें हो चुकी हैं। सोमवार को मेडिकेयर नामक अस्पताल में नाजमा की मौत हो गई जिस मामले में गैर इरादतन हत्या का मुकदमा भी दर्ज किया जा चुका है। लेकिन स्वास्थ्य व चिकित्सा विभाग इन अस्पतालों के खिलाफ कोई कारवाई नही ंकर रहे हैं। वास्तव में पूरे इलाके में यह अस्पताल खुले हुए हैं। सूत्र बताते हैं कि महकमे को हर महीने बंधी बंधाई एक रकम पहुंच जाती है। इसमें कितनी सच्चाई यह तो नहीं जानते लेकिन इन झोलाछाप अस्पतालों के खिलाफ कारवाई नहीं होना इस बात को सिद्ध करता है कि कुछ ना कुछ सांठ गांठ अवश्य है।

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