भाजपा 42 साल में जीरो से लेकर हीरो तक का सफर

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पंकज शर्मा एडवोकेट संपादक अमर भास्कर डाट काम

भारतीय जनता पार्टी स्थापना दिवस पर विशेष

भारतीय जनता पार्टी BJP की स्थापना आज से ठीक 42 साल पहले आज ही के दिन 6 अप्रेल 1980 को हुई थी। भाजपा के संस्थापक अध्यक्ष पं अटल विहारी वाजपेई Atal Bihari vajpai बने थे। इसके बाद भाजपा ने पीछे मुडकर कभी नहीं देखा। पहले ही पडाव में भाजपा ने 1984 में हुए चुनाव में दो लोकसभा की सीटें हासिल की थीं। इसके बाद भाजपा लगातार प्रगति के सोपान चढती चली गई इसी प्रगति की कहानी आज अमर भास्कर डाट काम आपको बता रहा है।
भाजपा के गठन की कहानी भी बहुत रोचक है। हुआ यूं कि वर्ष 1977 में जनता पार्टी कांग्रेस के विकल्प के रूप में उभरी थी। इस बार जनता पार्टी को 295 सीटें प्राप्त हुईं।

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तीन साल बाद हुए लोक सभा चुनाव में जनता पार्टी केवल 31 सीटों पर ही सिमट गई। इससे जनता पार्टी का शीर्ष नेतृत्व बेहद चिंतित था। शीर्ष नेतृत्व की 4 अपे्रल 1980 को एक जनता पार्टी की राष्ट्रीय कार्यकारणी की बैठक हुई जिसमें इस हार के लिए जनसंघ के पूर्व नेताओं को जिम्मेदार ठहराया गया। इसके बाद जनसंघ के पूर्व नेताओं को जनता पार्टी से निष्काशित कर दिया गया। इसके बाद पं अटलविहारी वाजपेई Atal Bihari vajpai व लालकृष्ण आडवाडी व अन्य जनसंघ नेताओं ने 6 अपे्रल 1980 को फीरोज शाह कोटला मैदान में भारतीय जनता पार्टी के गठन की घोषणा कर दी गई। पं अटल बिहारी वाजपेई Atal Bihari vajpai पहले अध्यक्ष बनाए गए।

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इसके बाद भाजपा की प्रगति का सफर शुरू हुआ। 1984 में पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की मृत्यु के बाद हुए लोक सभा चुनाव में भाजपा को पूरे देश में मात्र 2 लोकसभा सीटें मिलीं। जबकि इस बार पार्टी को कुल 1.82 प्रतिशत वोट मिले थे। इसके बाद अगला आम चुनाव 1989 में हुआ इस बार भाजपा ने जनता दल से गठबंधन किया था। इस बार हुए लोक सभा चुनाव में सांसदों की संख्या 2 बढकर 85 हो गई एवं वोट प्रतिशत बढकर 3.41 प्रतिशत हो गया। भाजपा ने जनता दल की सरकार को बाहर से समर्थन दिया था। इधर भाजपा ने राम मंदिर के निर्माण का वीडा उठाया हुआ था। इधर प्रधानमंत्री वीपी ंिसह ने मंडल सिफारिशों का पिटारा खोल दिया था। इस समय आरक्षण का जो जिन्न बाहर आया था। इससे देश भर के छात्रों ने आरक्षण का विरोध किया था। जिससे सरकार का भारी विरोध हो रहा था। इसी समय भाजपा BJP ने वर्ष 1991 में जनता दल की सरकार से अपना समर्थन वापस ले लिया। इसके बाद मध्यावधि चुनाव हो गए। इसके बाद 1991 में हुए चुनाव में भाजपा को 120 लोकसभा सीटें मिलीं जबकि वोट प्रतिशत बढकर 5.53 प्रतिशत हो गया।

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अगला लोकसभा चुनाव 1996 में हुआ था इस लोकसभा चुनाव में भाजपा का वोट प्रतिशत बढकर 6.79 प्रतिशत हो गया एवं लोकसभा की सीटों की संख्या बढकर 161 हो गई। इस बार भाजपा की देश में पहली सरका बनी भाजपा देश की सबसे बडी पार्टी होने के कारण राष्ट्रपति ने भाजपा नेता अटलविहारी वाजपेई को सरकार बनाने का न्योता दिया और यह सरकार मात्र 13 दिन ही टिक सकी, और मजबूर होकर प्रधानमंत्री अटल विहारी वाजपेई Atal Bihari vajpai ने इस्तीफा दे दिया। इसके बाद संयुक्त मोर्चा की सरकार बनी जो बीच में ही गिर गई। अब 1998 में पुनः मध्यावधि चुनाव हुए। इस बार हुए मध्यावधि चुनाव में भाजपा की सीटें फिर से बढ गईं और यह सीटें बढकर 182 हो गईं और वोट प्रतिशत बढकर 9.42 प्रतिशत हो गया। अबकी बार पं अटलविहारी वाजपेई Atal Bihari vajpai की सरकार फिर से बनी और यह सरकार 13 महीने तक चली और यह सरकार 1 वोट से गिर गई थी।

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इस सरकार के गिरने के बाद 1999 में एक बार फिर से मध्यावधि चुनाव हुए। इस बार भाजपा BJPकी केवल 1 सीट की ही बढोत्तरी हुई यह सीटें 182 से बढकर 183 हो गईं। लेकिन वोट प्रतिशत इस बार घट गया और यह वोट प्रतिशत 9.42 से घटकर 8.65 प्रतिशत रह गया। इस बार सरकार ने कार्यकाल पूरा किया, और वर्ष 2004 में हुए चुनाव में भाजपा की सीटों की संख्या में अधिक गिरावट आ गई और यह सीटों की संख्या 183 से घटकर 138 हो गईं। वोट प्रतिशत भी घट गया लेकिन यह अधिक नहीं घटा यह प्रतिशत 8.65 की तुलना में इस बार बहुत कम घटा 8.63 प्रतिशत रहा। अगला चुनाव भाजपा के लिए फिर से परेशान करने वाला रहा 2009 में हुए चुनाव में भाजपा की सीटों में फिर से गिरावट आई और इस गिरावट के साथ भाजपा 138 से घटकर 116 पर आ गई। इस बार भी वोट प्रतिशत घटा यह वोट प्रतिशत घटकर 7.84 प्रतिशत रह गया।

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अब अगला चुनाव इस बार भाजपा के लिए अब तक का सबसे बेहतर चुनाव साबित हुआ, इस चुनाव में भाजपा का चेहरा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी Narendra Modi थे। अब भाजपा की सीटें बढकर 282 हो गईं। वोट प्रतिशत में भी बहुत ही बढोत्तरी हुई जो 7.84 से बढकर 17.1 हो गया। अगला लोक सभा चुनाव फिर से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी Narendra Modi के नेतृत्व में ही हुआ और इस बार वोट प्रतिशत फिर से बढ गया देश में भाजपा का वोट प्रतिशत 17.1 से बढकर 22.9 हो गया। सीटों की संख्या में भी इजाफा हुआ और भाजपा ने अबतक का सबसे बेहत प्रदर्शन करते हुए 303 सीटें लोकसभा में हासिल कीं। इस प्रकार अगर 1980 की तुलना में देखा जाए तो सांसदों की संख्या के सापेक्ष 15000 प्रतिशत की बढोत्तरी हुई है जबकि वोट प्रतिशत 1000 प्रतिशत तक बढा है। ( वैसे तो आंकडों में पूरी सावधानी बरती गई है फिर भी किसी भी त्रुटि के लिए लेखक क्षमा प्रार्थी है)

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