डीपी के पुत्र कुणाल समेत रापद के सभी प्रत्याशियों की जमानत हो गई जब्त

0
759

एक समय अपने बल पर बदायूं जिले की दो सीटों पर विधायक जिताने वाले डीपी यादव अपने बेटे की जमानत तक बचाने में असफल रहे। बदायूं जिले में वर्ष 1996 से डीपी यादव राजनीति कर रहे हैं। 1996 में यादव संभल जिले से लोकसभा का चुनाव लडे थे। यह चुनाव डीपी यादव ने बसपा से लडा था, और वह यहां से सांसद बने थे। इसके बाद से डीपी यादव बदायूं जिले की राजनीति लगातार कर रहे हैं। लगभग सभी लोकसभा चुनाव डीपी यादव ने अपने दल से या किसी अन्य दल से लडे हैं। केवल 2019 का चुनाव वह नहीं लडे क्योंकि उस समय वह जेल में थे। डीपी यादव ने अपने बल पर बदायूं में अच्छी लोक प्रियता भी हासिल की थी। वर्ष 2002 में डीपी यादव ने बिसौली विधानसभा से अपने बेटे विकास यादव को राष्ट्रीय परिवर्तन दल से चुनाव लडाया था। विकास यादव मामूली अंतर से सपा के योगेंद्र कुमार उर्फ कुन्नू बाबू से चुनाव हार गए। इसके बाद विकास यादव नीतीश कटारा हत्या कांड में जेल चले गए। इसके बाद वर्ष 2007 में डीपी यादव स्वयं सहसवान विधानसभा से चुनाव लडे जबकि उनकी पत्नी श्रीमति उमलेश यादव बिसौली से चुनाव लडीं थी। इस बार दोनों की सीटें डीपी यादव की झोली में गईं। पूरे जिले में डीपी यादव का डंका बज गया। इसके बाद 2012 में बिसौली विधानसभा आरक्षित हो गई जबकि डीपी यादव सहसवान से फिर चुनाव लडे लेकिन इस बार सपा के ओमकार सिंह से चुनाव हार गए। 2017 में चूंकि डीपी यादव जेल चले गए थे इसलिए सहसवान से डीपी यादव की पत्नी उमलेश यादव चुनाव लडीं और वह फिर से समाजवादी पार्टी के प्रत्याशी ओमकार सिंह से चुनाव हार गईं। इस बार जहां सहसवान से ओमकार सिंह ने अपने बेटे बृजेश यादव को लांच किया वहीं डीपी यादव ने भी अपने बेटे विकास यादव को चुनाव लडाया। लेकिन इस बार कुणाल यादव की इतनी बुरी हालत होगी इसका किसी को अंदाजा हीं नहीं था। इस बार डीपी यादव के पूरे जिले के सभी प्रत्याशियों सहित पुत्र कुणाल यादव की भी जमानत जब्त हो गई। जो लोगों के बीच चर्चा का विषय है। किसी ने भी कुनाल यादव को इतना कम करके नहीं आंका था।

(Visited 488 times, 1 visits today)

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here