ओमप्रकाश राजभर जहूराबाद विधानसभा से चुनावी चक्रव्यूह में

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अखिलेश यादव को मुख्यमंत्री बनाने का सबसे पहले दावा करने वाले व स्वयं को सबसे मजबूत सिपहसालार बताने वाले ओमप्रकाश राजभर भी अपनी जहूराबाद विधानसभा में फंसते नजर आ रहे है। इसका सबसे बडा कारण बसपा प्रमुख मायावती बन गईं। मायावती ने समाजवादी पार्टी की सरकार में पूर्व मंत्री रहीं शादाब फातिमा को टिकिट दे दिया है। इससे मुस्लिम वोटर हाथ से निकलता दिख रहा है। जबकि भाजपा से कालीचरंण राजभर चुनाव मैदान में हैं।
यहां बता दें कि गाजीपुर जिले की जहूराबाद विधानसभा पर अंतिम चरण यानी आगामी 7 मार्च को मतदान होना है। यहां पर पहले बसपा ने बुझारत राजभर को अपना टिकिट का दावेदार बनाया था। लेकिन राजभर वोटों में बुझारत राजभर की बढिया पकड ना होने की सूचना पर बसपा ने शादाव फातिमा को अपना प्रत्याशी बना दिया। शादाव फातिमा समाजवादी पार्टी की लम्बे समय से नेता रही हैं साथ ही 2012 से 2017 की अखिलेश यादव की सरकार में मंत्री भी रही थीं। 2017 के बाद जब अखिलेश यादव से नाराज उनके चाचा शिवपाल यादव ने अलग पार्टी बनाई तब शादाव फातिमा शिवपाल यादव की प्रगतिशील समाजवादी पार्टी मंे चली गईं। इस बार समाजवादी से गठबंधन करने के कारण शिवपाल यादव के उम्मीदवार भी समाजवादी पार्टी से ही चुनाव लडने वाले थे। शादाव फातिमा स्वयं को यहां समाजवादी पार्टी के टिकिट का प्रबल दावेदार मान रही थीं।
इसी बीच ओमप्रकाश राजभर की पार्टी से अखिलेश यादव का गठबंधन हो गया। इसलिए यह सीट ओमप्रकाश राजभर के खाते में चली गई। इसी कारण से शादाव फातिमा को टिकिट नहीं मिल सका। इसी से नाराज शादाव फातिमा ने सपा छोड बसपा का दामन थाम लिया, और बसपा ने भी बझारत राजभर का टिकिट काटकर शादाव फातिमा को टिकिट दे दिया। अब यहां मुस्लिम वोटों में अच्छी खासी सेंध लगने की संभावना है। इन दोनों टिकिटो के वितरण के बाद राजभर समाज में अच्छी खासी पकड रखने वाले कालीचरण राजभर को भाजपा ने अपना उम्मीदवार बना दिया। जिससे ओमप्रकाश राजभर की सीट खतरे में दिखाई दे रही है। अब अगर इस सीट के जातीय समीकरण पर अगर ध्यान दे ंतो कुल 446682 मतदाताओं वाली इस विधानसभा पर राजभर वोट सबसे अधिक 75490 हैं जबकि मुस्लिम वोट 27637 हैं। इसके साथ ही चैहान वोट 34000 हैं, जबकि 14891 ब्राहमण वोट है। इसके साथ ही 43840 यादव मतदाता हैं। यहंा पर दलित वोट भी 75 हजार से अधिक है। अब यहां देखना यह है कि दलित व मुस्लिम वोट एक साथ आ गए तब शादाव फातिमा को यहां से विधायक बनने से कोई रोक नहीं पाएगा। अगर यादव और राजभर वोट एक साथ रहे तब यहां से ओमप्रकाश राजभर विधायक बन जाऐंगे। जबकि भाजपा प्रत्याशी कालीचरण राजभर के दावेप र गौर करें तो उनका कहना है कि राजभर वोट हमारे साथ है। ओमप्रकाश राजभर से राजभर वोट नाराज है पिछली बार भाजपा गठबंधन से विधायक बनने के बाद निजी हितों की वजह से ओमप्रकाश राजभर सरकार का साथ छोडकर अलग हो गए। उन्होंने यहां कोई भी विकास नहीं कराया है। यदि ऐसा हुआ तब ओमप्रकाश राजभर स्वयं ही संकट में फंस जाऐगे। अब आने वाली 10 मार्च ही बताएगी कि जहूराबाद विधानसभा से कौन विधायक बनता है।

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